उत्तराखंडस्वास्थ्य
by cradminApril 11, 2026April 11, 2026
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देहरादून, मैक्स हॉस्पिटल ने विश्व पार्किंसंस दिवस के अवसर पर पार्किंसंस रोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने और शुरुआती जांच के महत्व पर जोर दिया। अस्पताल ने बताया कि यह एक तेजी से बढ़ता न्यूरोलॉजिकल विकार है, जो व्यक्ति की चलने-फिरने की क्षमता और जीवन की समग्र गुणवत्ता को प्रभावित करता है।
इस मौके पर डॉ. आयुष सिंह, कंसल्टेंट – न्यूरोलॉजी, मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, देहरादून ने कहा कि पार्किंसंस रोग अक्सर शुरुआती चरण में पहचान में नहीं आता। उन्होंने बताया कि कई मरीज हल्के कंपन, शरीर में अकड़न या चलने-फिरने में मामूली बदलाव जैसे शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि समय पर पहचान और उपचार से इस बीमारी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्किंसंस केवल मोटर लक्षणों तक सीमित नहीं है। कंपन और धीमी गति के अलावा, मरीजों को नींद में गड़बड़ी, मूड में बदलाव और सोचने-समझने में कठिनाई जैसे गैर-मोटर लक्षण भी हो सकते हैं। इसलिए इलाज के दौरान इन सभी पहलुओं पर ध्यान देना आवश्यक है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पार्किंसंस रोग के प्रभावी प्रबंधन के लिए दवाओं के साथ-साथ जीवनशैली में सुधार और नियमित निगरानी जरूरी है। बहु-विषयक दृष्टिकोण अपनाकर मरीजों की कार्यक्षमता और जीवन गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है।
इस अवसर पर मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, देहरादून ने लोगों से अपील की कि वे शुरुआती लक्षणों को पहचानें और समय रहते चिकित्सकीय परामर्श लें। साथ ही, पार्किंसंस से जूझ रहे मरीजों के लिए समाज में जागरूकता और सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
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