रिपोर्ट- गिरीश चंदोला
थराली। चमोली जनपद के थराली विकासखंड में लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्राणमती नदी पर जिस लकड़ी की अस्थायी पुलिया के निर्माण के लिए हाल ही में निविदा जारी की गई है, वह पुलिया चार माह पहले ही बनकर तैयार हो चुकी है और उस पर छोटे वाहनों तथा पैदल यात्रियों की आवाजाही भी लगातार हो रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह अस्थायी लकड़ी की पुलिया बरसात के बाद ही तैयार कर दी गई थी। थराली–सूना–पैनगढ़ क्षेत्र के ग्रामीण रोज़मर्रा के आवागमन के लिए इसी पुलिया का उपयोग कर रहे हैं। बावजूद इसके, अब लोक निर्माण विभाग थराली द्वारा उसी पुलिया के लिए निविदा जारी किया जाना लोगों की समझ से परे है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि पुलिया पहले ही बन चुकी है, तो चार महीने बाद निविदा निकालने की आवश्यकता क्यों पड़ी? क्या यह प्रक्रिया किसी विशेष ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए अपनाई गई है, या फिर सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला है?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद निविदा जारी करना विभागीय नियमों और पारदर्शिता दोनों पर प्रश्नचिह्न लगाता है। लोगों में यह चर्चा आम है कि कहीं लोक निर्माण विभाग ठेकेदारों के पक्ष में काम करते हुए सरकारी धन की बंदरबांट तो नहीं कर रहा।
मामले को लेकर अब ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों द्वारा उच्च स्तर पर जांच की मांग उठने लगी है। यदि समय रहते इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो यह लोक निर्माण विभाग की साख पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।
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