देहरादून : आंदोलन से आदेश तक, और आदेश से अनंत इंतज़ार तक, उत्तराखंड में बीते एक दशक से एक अजीब लेकिन खतरनाक परंपरा बन चुकी है। जब भी कोई बड़ा घोटाला, राजनीतिक संकट, भर्ती घपला या हाई-प्रोफाइल अपराध सामने आता है, तो जनता की एक ही मांग होती है— CBI जांच। आंदोलन होते हैं, सड़कें भरती हैं, सरकार दबाव में आती है और अंततः मामला Central Bureau of Investigation को सौंप दिया जाता है।
लेकिन असली सवाल यह है कि CBI जांच के बाद न्याय कहाँ है?
2012 से जनवरी 2026 तक उत्तराखंड में हुई CBI जांचों का रिकॉर्ड बताता है कि जांच तो शुरू होती है, लेकिन नतीजे सालों तक सामने नहीं आते।
2013: ARIES नैनीताल घोटाला — जांच हुई, इंसाफ नहीं
नैनीताल स्थित ARIES संस्थान में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों पर हाईकोर्ट के आदेश से CBI जांच शुरू हुई। चार्जशीट दाखिल की गई, लेकिन आज भी मामला अदालत में विचाराधीन है। करीब 13 साल बाद भी न दोष तय हुआ, न जवाबदेही।
2016: हरीश रावत स्टिंग केस राजनीतिक भूचाल, कानूनी सन्नाटा
विधायकों की खरीद-फरोख्त से जुड़े स्टिंग वीडियो ने 2016 में राज्य की राजनीति हिला दी।
केंद्र सरकार के निर्देश पर CBI ने प्रारंभिक जांच (PE) दर्ज की। पूछताछ हुई, फॉरेंसिक जांच हुई, लेकिन कोई ठोस कानूनी नतीजा आज तक सामने नहीं आया।
2017: NH-74 मुआवजा घोटाला CBI की मांग, SIT की जांच
₹300 करोड़ से अधिक के मुआवजा घोटाले में CBI जांच की मांग ज़ोरों पर उठी।
हालांकि जांच राज्य की SIT ने की। कई PCS अधिकारी जेल गए, लेकिन मामला आज भी अदालत में लंबित है। CBI यहाँ सिर्फ एक “मांग” बनकर रह गई।
2019: छात्रवृत्ति घोटाला कार्रवाई अधूरी
समाज कल्याण विभाग की छात्रवृत्ति योजनाओं में करोड़ों रुपये के गबन का मामला सामने आया। CBI ने कई निजी शिक्षण संस्थानों पर चार्जशीट दाखिल की। वसूली की प्रक्रिया जारी है, लेकिन छात्रों को पूरा न्याय अब भी नहीं मिला।
2023: उद्यान विभाग घोटाला FIR तक पहुँची जांच
पौधों की खरीद और सब्सिडी में बड़े भ्रष्टाचार पर हाईकोर्ट के आदेश से CBI जांच शुरू हुई।
पूर्व निदेशक और अन्य अधिकारियों पर FIR दर्ज हुई। करोड़ों की बेनामी संपत्तियों के दस्तावेज जब्त किए गए। पर अभी तक कोई गिरप्तारी नहीं हो सकी मामला अभी भी जांच और कार्रवाई के बीच लटका हुआ है।
2025: महा-भर्ती पेपर लीक युवाओं का भविष्य अधर में
भर्ती परीक्षा पेपर लीक ने हजारों युवाओं का भविष्य संकट में डाल दिया। राज्यभर में विरोध प्रदर्शन हुए और सरकार को CBI जांच की सिफारिश करनी पड़ी। दिसंबर 2025 में CBI ने जांच संभाली। आयोग के पूर्व अधिकारी और मास्टरमाइंड जांच के दायरे में हैं, लेकिन युवाओं का सवाल अब भी वही है फैसला कब आएगा?
2025: LUCC को-ऑपरेटिव फ्रॉड ₹500 करोड़ की ठगी
LUCC को-ऑपरेटिव सोसायटी के जरिए ₹500 करोड़ की पोंजी स्कीम का खुलासा हुआ।
हाईकोर्ट के आदेश पर CBI जांच शुरू हुई। 46 लोगों पर FIR दर्ज हुई, जिसमें कुछ चर्चित नाम भी शामिल हैं। लेकिन हजारों निवेशक आज भी अपने पैसों की वापसी का इंतज़ार कर रहे हैं।
और अब अंकिता भंडारी मामला न्याय की अग्निपरीक्षा
जनवरी 2026 में मुख्यमंत्री की सिफारिश के बाद CBI ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में जांच शुरू की। “VIP एंगल” और सबूत मिटाने की साजिश की गहराई से जांच की जा रही है।
CBI ने पुराने रिकॉर्ड कब्जे में ले लिए हैं। अब यह मामला तय करेगा कि क्या CBI इस बार सिर्फ जांच नहीं, न्याय भी दिला पाएगी?
उत्तराखंड में CBI जांच अब सरकारों के लिए एक राजनीतिक सेफ्टी वाल्व बनती जा रही है।
मामला CBI को सौंपते ही जवाबदेही खत्म हो जाती है न समय-सीमा, न सार्वजनिक प्रगति रिपोर्ट, न देरी पर कोई जिम्मेदारी।
उत्तराखंड का अनुभव साफ कहता है CBI जांच मिलना आंदोलन की जीत हो सकती है, लेकिन पीड़ित के लिए यह अक्सर लंबे इंतज़ार की शुरुआत बन जाती है। जब तक जांच की समय-सीमा तय नहीं होगी और नतीजों पर जवाबदेही नहीं होगी, तब तक न्याय तोते के पिंजरे में बंद एक उम्मीद ही बना रहेगा।
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