देहरादून। गढ़वाल की ऐतिहासिक राजधानी रही पुरानी टिहरी की वर्ष 1952 से चली आ रही गौरवशाली रामलीला परंपरा शुक्रवार को देहरादून में एक बार फिर श्रद्धा, भक्ति और सनातन संस्कृति के रंग में जीवंत हो उठी। जन्माष्टमी के पावन अवसर पर रेसकोर्स स्थित श्री गुरु नानक मैदान में श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952, देहरादून (पंजी.) की ओर से हनुमान ध्वजा स्थापना के साथ भव्य रामलीला महोत्सव-2026 का विधिवत शुभारंभ हुआ।ढोल-दमाऊ की मंगल ध्वनि और जय श्रीराम, जय बजरंगबली के जयघोष के बीच हनुमान ध्वजा की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। श्रद्धालुओं ने ध्वजा की परिक्रमा कर भगवान श्रीराम और पवनपुत्र हनुमान का स्मरण किया। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन-पूजन संपन्न हुआ और विधि-विधानपूर्वक हनुमान ध्वजा स्थापित की गई। ध्वजा स्थापना के साथ ही रामलीला की रिहर्सल प्रारंभ करने की पुरातन परंपरा का भी शुभारंभ हुआ।1952 की परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्पसमिति के अध्यक्ष अभिनव थापर ने कहा कि पुरानी टिहरी की वर्ष 1952 से चली आ रही रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि गढ़वाल की लोकसंस्कृति, आस्था और सनातन परंपरा की अमूल्य धरोहर है। इसी गौरवशाली विरासत को देहरादून में वर्ष 2023 से निरंतर पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि जन्माष्टमी के पावन अवसर पर हनुमान ध्वजा स्थापना के साथ रामलीला की रिहर्सल शुरू करने की परंपरा को आज भी उसी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। इस वर्ष भी 1952 से चली आ रही पुरानी टिहरी की प्रसिद्ध रामलीला की चौपाइयों, कथा, संवाद और पारंपरिक मंचन शैली को मूल स्वरूप में आधुनिक तकनीक के साथ प्रस्तुत किया जाएगा।82 लाख से अधिक दर्शकों तक पहुंची थी रामलीलासमिति के अनुसार वर्ष 2025 में आयोजित भव्य रामलीला महोत्सव को विभिन्न माध्यमों से 82 लाख से अधिक दर्शकों ने देखा। इस व्यापक पहुंच ने रामलीला को उत्तराखंड की प्रमुख और सर्वाधिक देखी जाने वाली रामलीलाओं में पहचान दिलाई। समिति का प्रयास है कि प्रभु श्रीराम की मर्यादा, आदर्श और सनातन संस्कृति का संदेश देश-दुनिया तक पहुंचे तथा युवा पीढ़ी अपनी जड़ों और गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत से जुड़ सके।आधुनिक तकनीक के साथ दिखेगा पारंपरिक रामलीला का भव्य स्वरूपरामलीला महोत्सव-2026 में भव्य कलश यात्रा, डिजिटल लाइव टेलीकास्ट, लेजर एवं साउंड शो, भव्य मेला, बच्चों के लिए झूले और चरखी सहित अनेक आकर्षण होंगे। विजयादशमी के अवसर पर रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण के विशाल पुतलों का दहन किया जाएगा।अभिनव थापर ने कहा कि समिति का उद्देश्य मात्र रामलीला का आयोजन करना नहीं, बल्कि पुरानी टिहरी की 1952 से चली आ रही इस ऐतिहासिक परंपरा को देहरादून में नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम की मर्यादा, सत्य, धर्म और न्याय के आदर्श आज भी समाज के लिए उतने ही प्रासंगिक हैं। रामलीला इन्हीं आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है।कार्यक्रम में समिति के अध्यक्ष अभिनव थापर, सचिव अमित पंत, गिरीश पैन्यूली, नरेश कुमार, गिरीश पांडे, दुर्गा भट्ट, नीता बहुगुणा, अजय पैन्यूली, नितिन डंगवाल, आशीष भूटानी, रामेन्द्र सिंह सहित समिति के पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे।हनुमान ध्वजा स्थापना के साथ रेसकोर्स का वातावरण भक्ति और राममय हो गया। ढोल-दमाऊ की मंगल ध्वनि के बीच गूंजते जय श्रीराम के जयघोष ने मानो पुरानी टिहरी की उस ऐतिहासिक रामलीला की स्मृतियों को देहरादून की धरती पर फिर से जीवंत कर दिया।
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