गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडे ने एबीपी लाइव से बातचीत में बताया कि, इस बार चारधाम यात्रा की शुरुआत थोड़ी देर से हुई, जिसका असर शुरुआती आंकड़ों पर पड़ा है. इसके अलावा हाल ही में समाप्त हुए कुंभ मेले को भी उन्होंने एक बड़ी वजह बताया. पांडे के अनुसार, “हर परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं होती कि वह साल में दो बड़ी तीर्थ यात्राओं का खर्च एक साथ उठा सके. इस साल कुंभ में लगभग 30 करोड़ लोगों ने भाग लिया. जाहिर है कि इनमें से कई श्रद्धालु चारधाम यात्रा को अगले वर्ष के लिए टाल सकते हैं.”
7 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने किया चारधाम के दर्शन- गढ़वाल आयुक्त
पांडे ने यह भी कहा कि श्रद्धालुओं की संख्या में यह अंतर चिंता का विषय नहीं है, क्योंकि यात्रा का संचालन बेहद सुव्यवस्थित और सुरक्षित तरीके से हो रहा है. अब तक 7 लाख से अधिक श्रद्धालु चारधाम के दर्शन कर चुके हैं, और यात्रा की शुरुआत को अभी ज्यादा समय नहीं बीता है. ऐसे में भविष्य में संख्या तेजी से बढ़ने की पूरी संभावना है. उन्होंने कहा, “यात्रा को लेकर राज्य सरकार की तैयारियां पहले ही मुकम्मल थीं. सड़कों से लेकर चिकित्सा सुविधाओं और ट्रैफिक मैनेजमेंट तक हर स्तर पर हम सक्रिय हैं.
पिछले वर्ष 2023 में चारधाम यात्रा के दौरान ऐतिहासिक भीड़ देखने को मिली थी. इस बार भी शुरुआत में यही अनुमान लगाया गया था कि श्रद्धालुओं की तादाद उतनी ही या उससे भी अधिक हो सकती है, हालांकि शुरुआती आंकड़ों ने थोड़ी चिंता जरूर पैदा की, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि समय के साथ सब सामान्य हो जाएगा.
अंतरराष्ट्रीय हालात से भी यात्रा हुई प्रभावित
गढ़वाल आयुक्त ने यह भी माना कि पड़ोसी देश के साथ हाल ही में जो अंतरराष्ट्रीय हालात बने, उसका असर भी यात्रा पर पड़ा है. कुछ लोगों ने असमंजस की स्थिति को देखते हुए यात्रा से दूरी बनाना ही उचित समझा, हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि हालात सामान्य हो रहे हैं और अगले कुछ हफ्तों में यात्रा एक बार फिर रफ्तार पकड़ेगी.
उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को लेकर कोई समझौता नहीं कर रही है. सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया गया है. हेल्पलाइन से लेकर आपातकालीन सेवाओं तक, हर व्यवस्था को चौकस रखा गया है. “हमारा प्रयास है कि हर श्रद्धालु को न केवल दर्शन का अवसर मिले, बल्कि वह उत्तराखंड से एक सुखद अनुभव लेकर लौटे.
सबसे ज्यादा भीड़ केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में- गढ़वाल कमिश्रर
गढ़वाल कमिश्नर ने कहा कि चारधाम यात्रा के दौरान अब तक सबसे ज्यादा भीड़ केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में देखी गई है, वहीं गंगोत्री और यमुनोत्री में भी बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं. हेमकुंड साहिब की यात्रा भी शुरू हो चुकी है और वहां सिख श्रद्धालुओं की लगातार आमद बनी हुई है.
इस वर्ष यात्रा की विशेषता यह भी है कि तकनीकी माध्यमों से पंजीकरण की प्रक्रिया को पहले से अधिक सुलभ और पारदर्शी बनाया गया है. ऑनलाइन स्लॉट फुल हो जाने के बाद कई लोग ऑफलाइन पंजीकरण के जरिए यात्रा में शामिल हो रहे हैं. हरिद्वार, ऋषिकेश, विकासनगर और हरबर्टपुर जैसे स्थानों पर रोजाना हजारों की संख्या में लोग पंजीकरण करवा रहे हैं. ये अपने आप में दर्शाता है कि यात्रा सही ओर सुरक्षित चल रही है.
चारधाम यात्रा को लेकर राज्य प्रशासन पूरी तरह तैयार
विनय शंकर पांडे ने अंत में कहा कि चारधाम यात्रा उत्तराखंड की पहचान है और इसमें आने वाली हर चुनौती का सामना करने के लिए राज्य प्रशासन पूरी तरह तैयार है. “यह यात्रा सिर्फ धार्मिक महत्व की नहीं है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक विरासत और व्यवस्थागत क्षमता का भी परिचायक है
कुल मिलाकर, श्रद्धालुओं की संख्या में शुरूआती गिरावट के बावजूद राज्य सरकार पूरी तरह आश्वस्त है कि चारधाम यात्रा जल्द ही पूरी गति पकड़ लेगी और पिछले वर्षों की तरह इस बार भी लाखों श्रद्धालु उत्तराखंड की पुण्यभूमि पर आस्था की डगर पर कदम रखेंगे.
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