उत्तराखंड सरकार ने चारधाम यात्रा मार्गों पर घोड़े-खच्चरों के संचालन को लेकर एक नई और सख्त मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है. यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है. केदारनाथ, यमुनोत्री, हेमकुण्ड साहिब और आदि कैलाश चारों प्रमुख यात्रा मार्गों पर यह नियम एक साथ लागू होंगे.
अपर सचिव संतोष बडोनी की ओर से निदेशक पशुपालन को जारी शासनादेश में साफ कहा गया है कि यह कदम माननीय उच्च न्यायालय नैनीताल और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों के अनुपालन में उठाया गया है. जिससे यात्रियों की सुरक्षा और बेज़ुबान पशुओं का भी भला होगा.
बिना माइक्रोचिप नहीं मिलेगी एंट्रीनई व्यवस्था में हर पशु का पंजीकरण जिला पंचायत और जिला प्रशासन के जरिये कराना होगा. लेकिन, सिर्फ कागजी खानापूर्ति नहीं पंजीकरण से पहले स्वास्थ्य परीक्षण, ग्लैंडर्स जांच, कान में ईयर टैग और माइक्रोचिपिंग अनिवार्य होगी. स्वास्थ्य प्रमाणपत्र की वैधता केवल 45 दिन की होगी, उसके बाद दोबारा जांच करानी होगी.
रात में पशुओं से काम लेने की पुरानी आदत पर अब लगाम लगेगी. एसओपी में साफ लिखा है कि सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले पशुओं का संचालन पूरी तरह बंद रहेगा. टोकन सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच ही जारी होंगे. बारिश, ओलावृष्टि या बर्फबारी की स्थिति में भी पशुओं को रास्ते पर नहीं उतारा जाएगा. हर पशु स्वामी अधिकतम दो पशु रख सकेगा और एक दिन में एक ही टोकन मिलेगा.
हर किलोमीटर पर पानी-चारा का इंतजामपशु कल्याण को लेकर एसओपी काफी विस्तृत है. हर एक किलोमीटर पर पशुस्वामी को स्वच्छ और गुनगुना पेयजल, चारा और इलेक्ट्रोलाइट उपलब्ध कराना होगा. घावों से बचाने के लिए हल्की और वाटरप्रूफ काठियों का ही इस्तेमाल होगा. पानी के ट्रफ और संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे. हर ज़िले में एक अधिकारी और पशु चिकित्सक की नियुक्ति होगी जो इस पूरी व्यवस्था की निगरानी करेंगे.
पशु को पीटा तो सीधे FIR और ब्लैकलिस्टनई एसओपी में जो सबसे कड़ा प्रावधान है, वह उन लोगों के लिए है जो पशुओं के साथ बर्बरता करते हैं. पशुओं पर अधिक बोझ लादना, बीमार या घायल पशु से काम लेना, तेज़ दौड़ाना, मारना-पीटना और ईयर टैग या माइक्रोचिप से छेड़छाड़ ये सब पूरी तरह प्रतिबंधित हैं. ऐसा करने पर पशु मालिक पर एफआईआर दर्ज की जाएगी और लाइसेंस रद्द होगा.
हर यात्रा में पशु के साथ एक संचालक (हॉकर) का होना ज़रूरी है. बिना संचालक के पाया गया पशु तत्काल ज़ब्त कर लिया जाएगा. यात्रा मार्गों पर स्थायी और अस्थायी पशु चिकित्सालय स्थापित होंगे, जहां पशु चिकित्सक और पैरावेट कर्मी हमेशा तैनात रहेंगे। बीमार, घायल या लावारिस पशुओं के लिए 24 घंटे इन्फर्मरी सुविधा रहेगी.
रास्ते में मृत पाए गए पशुओं का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण होगा और पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी भी की जाएगी ताकि किसी लापरवाही की जवाबदेही तय हो सके.
यात्रा मार्ग पर पशुओं की संख्या निर्धारितप्रशासन की ओर से पहली बार मार्गवार वहन क्षमता तय की गई है. केदारनाथ मार्ग पर अधिकतम 5000 घोड़े खच्चर ही चल सकेंगे. हेमकुण्ड साहिब मार्ग पर यह संख्या 1050 और यमुनोत्री मार्ग पर 595 निर्धारित की गई है. इससे ज़्यादा पशु किसी भी हाल में नहीं चलेंगे यह सीमा अदालत और एनजीटी के निर्देशों की रोशनी में तय हुई है.
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