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ट्रेकिंग एजेंसी या दोस्त…’, बबीता पांडे के रहस्यमयी तरीके से गायब होने में किसका हाथ? 24 दिन से अब तक पुलिस के हाथ खाली – myuttarakhandnews.com

नई दिल्ली: उत्तराखंड के दयारा बुग्याल इलाके से लापता हुई रामनगर निवासी बबीता पांडे मामले में 24 दिन बीत जाने के बाद भी अब तक पुलिस और प्रशासन के हाथ कोई ठोस सबूत हाथ नहीं लगा है। हालांकि प्रशासन लगातार 24 वर्षीय युवती की खोजबीन के लिए कोशिश कर रही है।
युवती की तलाश के लिए ड्रोन और डॉग स्कवायड की भी मदद ली जा रही है। हालांकि प्रशासन के हाथ अब भी खाली हैं। इस घटना ने स्थानीय प्रशासन और परिजनों की चिंता बढ़ा दी है। पुलिस मामले में अब तकनीक को शामिल कर रही हैं। पुलिस के अनुसार, अब युवती के लापता मामले में मोबाइल सर्विलांस, कॉल डिटेल रिकार्ड यानी सीडीआर और अन्य तकनीकी पहलुओं की मदद ली जा रही है। इसका उद्देश्य घटनाक्रम को समझना और किसी संभावित सबूत तक पहुंचना है।
दो दोस्तों के साथ घूमने निकली थी बबीताएमबीए की छात्रा बबीता पांडे अपने दोस्तों के साथ उत्तराखंड के उत्तरकाशी घूमने निकली थीं। दोनों दोस्त में से एक हरपाल सिंह उत्तराखंड के उधम सिंह नगर का रहने वाला है और दूसरा हरमनप्रीत यूपी के शाहजहांपुर का रहना वाला है। तीनों ने दयारा बुग्याल ट्रेकिंग करने का प्लान बनाया, लेकिन 29 मई की रात से युवती का लापता हो गई। 24 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस, एसडीआरएफ, वन विभाग की संयुक्त टीमें भी सर्च अभियान चला रही है।
कहां से बबीता पांडे हुई गायब?उत्तरकाशी के एसपी कमलेश उपाध्याय के मुताबिक, वे सबसे पहले 25 मई को देहरादून गए और बाद में हरसिल, गंगोत्री और आसपास के पर्यटन स्थलों का दौरा किया। इसके बाद तीनों रायथल गांव गए और वहीं रुके। उन्हें आखिरी बार रायथल के सीसीटीवी कैमरों में देखा गया था।
एक दिन बाद तीनों ने रायथल से दयारा बुग्याल के लिए अपनी यात्रा शुरू की और रात बिताने के लिए वे गोई बेस कैंप में रुके, यहीं से बबीता पांडे आधी रात में गायब हो गई। इसके बाद से ही, इंडियन आर्मी, पुलिस, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल, वन विभाग और आपदा प्रबंधन के कर्मियों समेत 150 लोग खोज अभियान में शामिल है।
बबीता पांडे को खोजने के लिए घने जंगल, ट्रेकिंग मार्गों और गुफाओं के 5 किमी के दायरे में खोजी कुत्तों और ड्रोन निगरानी का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। गोई कैंप के पास एक झील में छह सदस्यीय गोताखोरों का एक दल भी तलाश कर रही है। साथ ही पुलिस ने सोशल मीडिया पर उसकी तस्वीर भी जारी की है और आमजन से उसे ढूंढने में मदद करने की अपील की है।
अधिकारियों का कहना है कि हर संभावित एंगल से मामले की जांच की जा रही है ताकि किसी भी अहम जानकारी को नजरंदाज न किया जाए। पुलिस की टीम सक्रिय है और सबूत जुटाने की कोशिश में जुटी हुई है। इधर स्थानीय लोगों का कहना है कि बबीता पांडे को परियां ले गईं हैं। बता दें कि यह पहाड़ी क्षेत्रों में लंबे समय चली आ रही पौराणिक मान्यता है। हालांकि प्रशासन इस तरह की मान्यताओं को अफवाह बता रहा है।
ट्रेकिंग एजेंसी का रजिस्ट्रेशन सस्पेंडजाचं के दौरान पर्यटन विभाग को एक बड़ी बात पता चली कि जिस ट्रेकिंग एजेंसी के जरिए तीनों ट्रेक पर गए थे, उसमें बबीता का नाम ही नहीं है। लेकिन वन विभाग को दिए गए कागज में बबीता का नाम दर्ज पाया गया है।
इस कारण प्रो माउंटेन नामक ट्रेकिंग एजेंसी का रजिस्ट्रेशन भी सस्पेंड कर दिया गया है। जांच पाया गया कि बबीता पांडे और उनके दोस्तों को फर्जी परमिट का इस्तेमाल कर ट्रेक पर भेजा गया था। पुलिस ट्रेकिंग गाइडों और एजेंसी से जुड़े लोगों से भी पूछताछ की जा रही।
उत्तरकाशी जिला पर्यटन अधिकारी केके जोशी ने कहा कि जांच में पता चला है कि बबीता पांडे या उनके साथियों के लिए आधिकारिक पर्यटन पोर्टल ‘एक्सप्लोर उत्तरकाशी’ पर कोई वैध डिजिटल परमिट जारी नहीं किया गया था। जांच से पता चला कि ट्रेकिंग एजेंसी ने बबीता पांडे और उसके दोस्तों के नाम खत्म हो चुके परमिट पर चिपकाकर सरकारी राजस्व नियमों और 150 ट्रैकर्स की दैनिक सीमा को दरकिनार किया। चेकपोस्ट पर क्यूआर कोड स्कैन करने पर, उससे पहले के यात्रियों का डेटा हासिल हुआ। केके जोशी ने बताया कि जालसाजी के कारण बचाव दल को यात्रियों और उनकी एजेंसी की पहचान करने में शुरू में देरी हुई।
बबीता के परिवार में कौन-कौन हैं?बबीता दो भाइयों की इकलौती बहन और परिवार की सबसे बड़ी औलाद है। उनके दोनों भाई हर्षित पांडे और तनुज पांडे रामनगर में पर्यटन व्यवसाय से जुड़े हैं। परिवार में माता, पिता और दादी हैं। बबीता पांडे के पिता गोपाल पांडे ने पुलिस और बचाव दलों से जल्द खोजने की अपील की है। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी बबीता पढ़ाई में तेज है और अभी वह एमबीए पढ़ रही है। साथ ही साथ वह पार्ट-टाइम नौकरी भी करती है।
गोपाल पांडे ने कहा कि करीब 5 साल पूर्व एक सड़क दुर्घटना में वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिसके बाद दिव्यांग हो गए और अब चल नहीं पाते। बबीता की दादी लक्ष्मी पांडे ने प्रशासन से पोती को सुरक्षित बरामद करने की अपील की है। साथ ही उन्होंने बताया कि बबीता की मां और उसका भाई हर्षित पांडे उत्तरकाशी में एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और प्रशासन की टीमों के साथ लगातार खोजबीन में जुटे हुए हैं।

Nandni sharma

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