देहरादून। धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के भीतर कार्यकर्ताओं की नाराजगी थमने का नाम नहीं ले रही है। स्थानीय विधायक और संगठन के बीच कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं को लेकर लंबे समय से चल रही चर्चाओं के बीच दो मंडल अध्यक्षों के इस्तीफे के बाद अब नगर निगम देहरादून में मनोनीत पार्षदों को लेकर सामने आ रहे नामों ने पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच एक बार फिर असंतोष को हवा दे दी है।पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा है कि संगठन द्वारा लिए जा रहे कुछ फैसलों में पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं को पर्याप्त महत्व नहीं मिल रहा है। यही वजह है कि मनोनीत पार्षदों के संभावित नामों को लेकर पार्टी के भीतर विरोध के स्वर मुखर होने लगे हैं।विशेष रूप से वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के पूर्व कैबिनेट मंत्री दिनेश अग्रवाल के साथ भाजपा में शामिल हुए पूर्व पार्षद स्वर्गीय राजेश परमार के पुत्र अभिषेक परमार तथा पीडब्ल्यूडी/नगर निगम से जुड़े ठेकेदार सुरेंद्र मित्तल उर्फ सोनू मित्तल के नामों को मनोनीत पार्षद के रूप में चर्चा में आने से पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं में असहजता की स्थिति बताई जा रही है।‘पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी पड़ेगी भारी’भाजपा के जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच यह सवाल उठ रहा है कि वर्षों से पार्टी के लिए सक्रिय रहने वाले कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर अपेक्षाकृत नए राजनीतिक चेहरों को प्राथमिकता दिए जाने का संदेश संगठन के लिए आने वाले समय में चुनौती बन सकता है।कार्यकर्ताओं का एक वर्ग मानता है कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को अपने पुराने कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने और उन्हें विश्वास में लेने की आवश्यकता है। उनका कहना है कि चुनावी राजनीति में बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत रखने वाले कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का असर चुनाव के दौरान दिखाई दे सकता है।महिला कार्यकर्ताओं में भी नाराजगी की चर्चामनोनीत पार्षदों के नामों को लेकर महिला कार्यकर्ताओं के बीच भी असंतोष की चर्चा है। पार्टी से जुड़ी कुछ महिला नेत्रियों द्वारा संगठन में लंबे समय से सक्रिय महिला कार्यकर्ताओं को प्रतिनिधित्व नहीं दिए जाने पर सवाल उठाए जाने की बात सामने आ रही है। इससे यह मुद्दा केवल पार्षद मनोनयन तक सीमित न रहकर संगठन में प्रतिनिधित्व और कार्यकर्ताओं की राजनीतिक भागीदारी से भी जुड़ता दिखाई दे रहा है।2027 से पहले बढ़ सकती है राजनीतिक चुनौतीधर्मपुर विधानसभा में लगातार सामने आ रही कार्यकर्ताओं की नाराजगी को 2027 के विधानसभा चुनाव के नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव से पहले संगठन के भीतर असंतोष को समय रहते नहीं संभाला गया तो इसका असर पार्टी की चुनावी रणनीति और विधायक विनोद चमोली की राजनीतिक चुनौतियों पर पड़ सकता है।फिलहाल मनोनीत पार्षदों को लेकर अंतिम निर्णय और उसके बाद पार्टी कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया पर सभी की निगाहें टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संगठन इस असंतोष को संवाद के जरिए शांत करता है या फिर धर्मपुर भाजपा में अंदरूनी खींचतान और अधिक राजनीतिक रूप लेती है।
नशा मुक्त समाज के लिए विभागीय समन्वय से चलाएं व्यापक जनजागरूकता अभियान- एडीएम देहरादून। जिले…
पौड़ी। जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया की अध्यक्षता में बुधवार को कलक्ट्रेट सभागार में राजस्व विभाग…
कचरा प्रबंधन में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर, जिलों में विशेष सेल गठित स्रोत…
हल्द्वानी; उत्तराखंड में सत्ता की हैट्रिक के लक्ष्य के साथ भाजपा बुधवार से हल्द्वानी में…
गणेश जोशी ने दिए जरूरी निर्देश हल्द्वानी। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के आगामी…
सभी तकनीकी पहलुओं की जांच के बाद ही किया जाए भवन को जर्जर घोषित- जिलाधिकारी…