Latest posts by Sapna Rani (see all)उत्तराखंड में स्थित चारों धामों के कपाट शीतकाल के लिए बंद हो चुके हैं. विधि विधान और विशेष पूजा अर्चना के साथ सभी चारों धामों बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट अब अगले छह महीनों के लिए बंद हो चुके हैं. इसी के साथ इस साल की चारधाम यात्रा का समापन हो चुका है और अब अगले साल फिर से चारधाम यात्रा शुरू होगी और देश के कोने-कोने से श्रद्धालु चारों धामों में दर्शन के लिए पहुंचेंगे. लेकिन अगर श्रद्धालु शीतकाल में भी चारों धामों में पूजा व दर्शन करना चाहते हैं तो वो इन चारों धामों के गद्दीस्थलों पर पूजा व दर्शन कर सकते हैं.इस बार चारधाम यात्रा के दौरान जो श्रद्धालु उच्च हिमालयी क्षेत्रों में स्थित धामों में जाने में असमर्थ रहे, वो भी गद्दीस्थलों पर शीतकाल में दर्शन और पूजा कर सकते हैं. सूबे की सरकार भी शीतकालीन यात्रा को बढ़ावा दे रही ताकि सूबे में सालभर पर्यटन और धार्मिक पर्यटन गतिविधियां चलती रहें. केदारनाथ धाम के कपाट तीन नवंबर को बंद हुए थे और बदरीनाथ धाम के कपाट 17 नवंबर को विधि विधान से बंद किये गये. बाबा केदार की पंचमुखी डोली ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में विराजमान है. अगले साल अप्रैल-मई में जब फिर से केदारनाथ के कपाट खुलेंगे तो यह डोली ऊखीमठ से केदारनाथ धाम के लिए प्रस्थान करेगी. शीतकाल में बाबा केदार की पूजा अर्चना ऊखीमठ में होती है.श्रद्धालु यहां जाकर दर्शन और पूजा कर सकते हैं. बदरीनाथ धाम की डोली पांडुकेश्वर योग बदरी में विराजमान हो गईं हैं. यह डोली 19 नवंबर को आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी जोशीमठ स्थित नृसिंह मंदिर में पहुंचेगी. पांडुकेश्वर व जोशीमठ में शीतकाल में श्रद्धालु भगवान बदरी विशाल की पूजा अर्चना व दर्शन कर सकेंगे. इसी तरह से अगले साल कपाट खुलने तक मां यमुना डोली खरशाली स्थित यमुना मंदिर में विराजमान है और मां गंगोत्री मुखवा में विराजमान है. श्रद्धालु यहां जाकर शीतकाल में पूजा-अर्चना और दर्शन कर सकते हैं. इस साल चारधाम यात्रा ने नये रिकॉर्ड स्थापित किये हैं. केदारनाथ में 16,52,070 श्रद्धालुओं, बदरीनाथ में 14,35,401, गंगोत्री 8,18,273 और यमुनोत्री 7,14,779 श्रद्धालुओं ने दर्शन किये हैं.
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